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भारत के महामहिम राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद परमार्थ निकेतन शिविर अरैल प्रयागराज पधारे। राष्ट्रीय संत मोरारी बापू के श्रीमुख से सुनी रामकथा

मानस कथा से होता है संशय का नाश – मोरारी बापू

हम राम के साथ, राम की माने – रामनाथ कोविंद

हमारे दिल और हमारे घर के आगे मोहब्बत लिखा हो – स्वामी चिदानन्द सरस्वती

प्रयागराज। भारत के महामहिम राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद जी अपनी धर्मपत्नी श्रीमती सविता कोविंद जी और बेटी स्वाति कोविंद महाकुंभ के पावन अवसर पर परमार्थ निकेतन शिविर, अरैल, प्रयागराज पधारे।

पूरे कोविंद परिवार ने परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी, म.म. स्वामी संतोषदास जी (सतुआ बाबा), साध्वी भगवती सरस्वती जी और पूज्य संतों के पावन सान्निध्य में राष्ट्रसंत पूज्य मोरारी बापू के श्रीमुख से हो रही दिव्य मानस कथा का रसपान किया।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी, साध्वी भगवती सरस्वती जी ने माननीय कोविंद जी और पूरे कोविंद परिवार का इलायची की माला पहनाकर अभिनन्दन किया।

राष्ट्रसंत पूज्य मोरारी बापू ने माननीय श्री रामनाथ कोविंद जी के साथ अपनी पुरानी स्मृतियों का स्मरण करते हुए कहा कि आपके सान्निध्य में बिताए दृश्य अद्भुत और अलौकिक हैं।

आज भी मुझे याद है, जब आप गुरूकुल आए थे, सभी व्यवस्थाएँ एक ओर थीं, पर आपकी आस्था एक ओर थी। आपने हमारे पूरे गांव को कहा था कि यदि कभी दिल्ली आओ तो कहीं और मत रुकना, राष्ट्रपति भवन में रुकना। इस प्रकार आपने राष्ट्रपति भवन को राष्ट्र भवन के रूप में सभी को दर्शन कराए। साधु संग माननीय राष्ट्रपति जी के लिए सदैव प्रथम रहा हैं।

उन्होंने कहा कि यह बात और है कि वह खामोश खड़े होते हैं, लेकिन जो बड़े होते हैं, वह बड़े ही होते हैं। बापू ने कहा कि पूज्य स्वामी जी के रूप में यहाँ पर परम विवेकी और परम विनयी बुद्ध पुरुषों का संगम अद्भुत है।

माननीय श्री रामनाथ कोविंद जी ने इस महाकुंभ व मानस संगम के अलौकिक कार्यक्रम में पूज्य बापू, पूज्य स्वामी जी, पूज्य साध्वी जी और सभी श्रद्धालुओं का अभिवादन करते हुए कहा कि आप सब मेरा परिवार हैं। मेरे मन में एक ही बात है कि बापू की श्रीराम कथा श्रृंखला की 950वीं कथा है, यह एक सुखद संयोग है और हम एक हजार श्रीराम कथाओं तक पहुंचने की ओर बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा, मैने देखा है कि हम श्रीराम को मानते हैं, उनके चरित्र को मानते हैं, उनके चरित्र को अपने जीवन में अपनाने का प्रयास करते हैं, उनकी शिक्षाओं को जानने का प्रयास करते हैं, लेकिन राम की नहीं मानते हैं। मानने में हम सभी लोग पहले हैं, परंतु जहाँ राम की बात मानने की बात आती है, वहां हम थोड़े से झिझकने लगते हैं। यह एक चुनौती है और इसे कैसे हम अपने जीवन में लाएं, इसके लिए हमें धीरे-धीरे चलते रहना होगा चरैवेति चरैवेति ताकि प्रभु श्रीराम का चरित्र हम सब के जीवन में आए।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि पूज्य बापू सनातन की परम ज्योति हैं, उन्होंने जिसे छू लिया, उसे अपना बना लिया। बापू का जीवन सदैव सेतु निर्माण करता रहा और इसके लिए उन्होंने अनेक संघर्ष झेले, वे अपनी हर श्वास को पूरे विश्वास के साथ जी रहे हैं।

स्वामी जी ने कहा कि समुद्र मंथन संग्राम से शुरू हुआ और संगम तक पहुंचा, अमृत तक पहुंचा। बापू का जीवन संग्राम नहीं, संग-राम को चरित्रार्थ करता है। उन्होंने कहा कि इस बार का कुम्भ ग्लोबल कुम्भ बन गया है। वास्तव में इस बार का कुम्भ अद्भुत है।

श्री कोविंद जी ने सत्ता से नहीं सत्य से परिवर्तन किया। यह सृजन से संगम की यात्रा है। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि हमारे दिल और हमारे घर के आगे मोहब्बत लिखा हो। अब समय आ गया है कि हम न बटेंगे, न बाटेंगे, न डरेंगे, न डराएंगे, न कटेंगे, न कटेंगे, न लड़ेंगे, न लड़ाएंगे। यही संगम के तट से संगम का संदेश है, जो हमारे देश के संगम को बचा के रखेगा।

श्री रामनाथ कोविंद जी और पूरे कोविंद परिवार ने स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी के पावन सान्निध्य में बैठकर पूज्य बापू के श्रीमुख से हो रही मानस कथा का बड़े ही प्रेमभाव से रसपान किया।

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